होमगार्ड जवानों के साथ ना इंसाफी, 22साल बाद भुगतान

छपरा  में डेढ़ हजार होमगार्ड जवानों  को 22 साल बाद उनकी मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है. हैरानी की बात ये है कि इनमें से कई जवान मर चुके हैं तो कई काम छोड़कर कहां चले गए उनका पता नहीं. हालांकि विभाग इन दिनों जवानों की खोजबीन में लगा हुआ है.छपरा. किसी को मजदूरी का भुगतान कितने दिन में कर देना चाहिए. आप कहेंगे दिहाड़ी मजदूर को एक दिन और मासिक मजदूर को महीने भर में भुगतान हो जाना चाहिए, लेकिन अगर मजदूरी कराने के 22 साल बाद भुगतान हो तो इसे क्या कहा जाए. यह हाल सरकारी विभाग का है. जी हां, छपरा  में डेढ़ हजार होमगार्ड जवानों  को 22 साल बाद उनकी मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है. हैरानी की बात ये है कि इनमें से कई जवान मर चुके हैं तो कई काम छोड़कर कहां चले गए उनका पता नहीं. हालांकि विभाग इन जवानों पर मेहरबानी कर अब मजदूरी के भुगतान के लिए खोज रहा है.

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22 साल पहले हुआ था ये काम
छपरा में होमगार्ड के दफ्तर में दीवारों पर सटे नामों में होमगार्ड जवान धुरेन्द्र तिवारी का भी नाम है. ये वही जवान है जिन्होंने 22 साल पहले मैट्रिक और इंटर परीक्षा में ड्यूटी की थी, लेकिन उस वक्त इनका भुगतान नहीं हुआ और इंतजार करते हुए इतने साल बीत गए. जबकि उनके जैसे ही कई जवान हैं जिनका भुगतान हो रहा है, लेकिन इनमें से कई मर गये तो कई सेवानिवृत हो गए हैं. जबकि बचे लोगों ने विभाग का चक्कर लगा कर उम्मीद छोड़ दी, लेकिन 22 साल बाद विभाग इन जवानों पर मेहरबान हुआ तो लोग कार्यालय पहुंचने लगे हैं.

आपको बता दें कि छपरा जिले में आज से 22 साल पहले 1997 से 2000 तक होने वाले मैट्रिक व इंटर परीक्षा में करीब डेढ़ हजार होमगार्ड जवानों ने ड्यूटी की थी, जिसकी राशि का भुगतान आज तक नहीं हो सका.

होमगार्ड जवान हुए खुश
होमगार्ड जवान ओम सिंह बताते हैं कि जवानों ने कार्यालय का चक्कर लगा लगाकर उम्मीद छोड़ दी, लेकिन 22 साल बाद अचानक उन्हें भुगतान की खबर मिली तो वह भागे भागे होमगार्ड कार्यालय पहुंचे जहां उनका नाम दीवार पर सटा था. इसके बाद होमगार्ड अपना अकाउंट नंबर विभाग को दे रहे हैं, ताकि उनको पैसा मिल सके. होमगार्ड हरेंद्र कुमार सिंह बताते हैं कि जिस वक्त इन जवानों ने कार्य किया था उस वक्त बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा इनका भुगतान नहीं किया गया, जिसके कारण इनका भुगतान लंबे समय से लंबित चल रहा था. अब जाकर विभाग ने दूसरे मद से इनके भुगतान की प्रकिया शुरू की है. उन्होंने बताया कि अब तक 25 फीसदी जवानों का भुगतान किया जा सका है, किन अधिकांश जवानों का कुछ पता नहीं चल सका है जिसके कारण भुगतान में दिक्कत आ रही है.

बहरहाल, इसे सिस्टम की लापरवाही ना कहें तो क्या कहें, क्‍योंकि सड़कों पर लोगों से वसूली के आरोप में पकड़े जाने वाले पुलिसकर्मियों में अधिकांश होमगार्ड जवान होते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इन होमगार्ड के जवानों के भुगतान के प्रति विभाग खुद ही उदासीन रहता है. फिलहाल विभाग की इस कार्रवाई से हजारों होमगार्ड जवानों को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन जरूरत है इस सिस्टम को बदलने की ताकि होमगार्ड के जवानों को उनका वेतन समय से मिल सके.

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